Wednesday, June 22, 2022

Respect Women.!

 That’s powerful...!


Every woman has a past. Some were physically abused. Some had violent parents. Some had pubertal issues. Some had sexual abuse as a child from their own family members. Some had messed up love stories. Some had been forced into sex in the name of love. Some had been drugged. Some were date raped. Some had been viciously photographed on bed. Some had been blackmailed by their ex-boyfriend. Some were in an abusive relationship. Some had menstrual problems. Some had a broken family. Some had a divorce. Some had an obesity issue. Some had financial droughts. Some had drug or alcohol addiction. Some had a few unsuccessful suicide attempts.


If you see a woman, who went through any of these but had already wiped her tears,tied her hair up, masked her sorrows with a divine smile, stood tall and strong, started walking towards her future because she still has some hope left inside her and has not given up on the concept of love that still exists in this world, do not stab her with her past. Do not confront her. Do not slap her with more abuse. Give way for her and walk beside her. May be hold her hands and walk for a while. You'll know how sweet that soul is and how strong her hopes are! You'll be amazed at how she carries herself after all her energy has been sucked out.


She need not always be only the woman next door or from a different home. She could be your own friend, your own sister, your own girlfriend, your own wife, even may be your own mother. 

Do not judge her by her past. Gift her the peaceful future that she deserves. Hold her hands against the world, which knows only to judge. Give her the love that she always yearned for. 

Saturday, May 28, 2022

भ्रष्टाचार के जड़ अधिकारीगण

 बेशक़ आप अपने जनप्रतिनिधियों से सवाल कीजिए,हर मुद्दे पर लड़िए,इसमें कोई शक नहीं है कि ये भी हर चीज़ के भ्रष्टाचार में लिप्त होते हैं...! 


लेकिन जब आम जनता सरकारी महकमों में बैठे कर्मचारियों से लेकर बड़े-बड़े अधिकारियों के खिलाफ अपनी आवाज़ बुलंद करने लगेंगे तो यकीन मानिए की हर चीजें बदलनी शुरू हो जायेगी...! क्योंकि सारे योजनाओं में अपनी कमीशन को बांट कर खाना योजना को सफल नहीं बनाना साफ साफ बात है की सारे भ्रष्टाचार के जड़ यही सब अधिकारी लोग होते हैं...!

Sunday, May 8, 2022

IAS-IPS धरती के भगवान.!

 आईएएस - आईपीएस धरती के भगवान


पूजा सिंघल के बहाने...


आईएएस - आईपीएस धरती के भगवान हैं... आपके पास जादुई छड़ी होती है। आपके लिए सब कुछ संभव है। आपके एक कॉल पर जिला हिलता है । आपकी सलाह से सरकारें चलती हैं। सचमुच आप भगवान हैं...


भगवान जी आप किस्मत और कर्म के धनी हैं। सिर्फ एक परीक्षा पास करते हैं और समाज के सबसे बड़े बुद्धिमान समझे जाते हैं। आप की हनक और ठसक से हर कोई वाकिफ है। नाम सिविल सर्वेंट है, लेकिन  ठसक सामंत वाली रखते हैं।  मॉडर्न जमाने के राजा तो आप ही लोग हैं। 


अगर आप आईएएस -आईपीएस हैं, तो आप भगवान हैं... आपके पिताजी भी वीसी बन सकते हैं। रिटायरमेंट के बाद आयोग के सदस्य बन सकते हैं। आपकी पत्नी संस्थान का डायरेक्टर बन सकती है। आप सबसे बड़ा कैंसर अस्पताल खोल सकते हैं। आप 10 बीघा में मछली पालन कर सकते हैं। आप बड़े निजी स्कूलों की लाइन लगा सकते हैं। आपका भाई नेशनल चैनल का पत्रकार बन सकता है। आप चैनल के पत्रकारों को मैगजीन के नाम पर 5-5 करोड़ का विज्ञापन देकर  भैया बन सकते हैं। 

आपके बेटे मोइनुल हक स्टेडियम में नहीं, अमेरिका के न्यूयॉर्क में टेनिस की ट्रेनिंग ले सकते हैं। आपके बेटे पटना के सरकारी स्कूल में नहीं रजवाड़ों के सिंधिया स्कूल में पढ़ सकते हैं। 

आप चाहे तो नौकरी छोड़कर मंदिर मस्जिद के सेक्रेटरी -डायरेक्टर बन सकते हैं । रिटायरमेंट के बाद भी आप किसी संस्थान के महानिदेशक बन सकते हैं। आपके नाक के नीचे करोड़ों रुपए का घोटाला होगा, लेकिन लालू यादव की तरह आप जेल नहीं  जा सकते।  रिटायरमेंट के बाद आप खुद वीसी बन सकते हैं। आपके जैसे बाल बुतरू को पढ़ाने वाले प्रकांड प्रोफेसर साहब लोग भले ही वीसी न बने,  लेकिन आप चुटकी बजाकर वीसी बन सकते हैं। 

 रिटायरमेंट के बाद आप ब्लैक मनी को ह्वाइट मनी करने के लिए बाबा बन सकते हैं। रिटायरमेंट के बाद आप गांधीजी की धरोहर का सीईओ बन सकते है। आप पर भले ही सूचना छिपाने का आरोप लगता है,  लेकिन रिटायरमेंट के बाद आप सूचना आयुक्त बन सकते हैं । जीवन भर अधिकारों का हनन करने के बावजूद,  आप मानवाधिकार का  सदस्य बन सकते हैं । आपकी पत्नी बड़का साहित्यकार बन सकती हैं और धड़ल्ले से किताबें छप सकती हैं।


सचमुच, अगर आप आईएएस- आईपीएस हैं , तो भगवान हैं...आपका कोई बाल भी बांका नहीं कर सकता है। आप अखबारों में आराम से छपवा सकते हैं कि कैश सिर्फ 24000 है और मारुति -800 कार पर चलते हैं। पत्रकारों की इतनी हिम्मत कहां कि आपसे पूछे कि महाराज, दिल्ली वाला तीनों फ्लैटवा किसके नाम से है। अयोध्या और नोएडा वाला प्लॉट किसके नाम से है। धरती के भगवान आपसे कोई पूछ ही नहीं सकता कि कौन सी फैक्ट्री में नोट छापे की चार -चार गो फ्लैट हो गया। आपका वेतन प्रोफेसर के बराबर ही होता है लेकिन प्रोफेसर साहब प्रोफ़ेसर ही रह जाते हैं और आपके पास अथाह संपत्ति... 

भगवान आपकी संपत्ति की जांच कोई कर ही नहीं सकता। किसकी हिम्मत है?  नेता की? कभी नहीं। आप दोनों का रिश्ता इतना मजबूत होता है कि कोई कुछ कर ही नहीं पायेगा आप दोनों में दामाद- ससुर का भी रिश्ता होता है। अब भला ससुर अपने दामाद की जांच कैसे करा सकते हैं।

 आपकी महिमा अपरंपार है।  एक क्लर्क बेचारा ट्रांसफर के लिए 10 साल से तड़पते रहता है और आप तो दूसरे स्टेट से नौकरी करके भी आ सकते हैं । आपकी गोटी आपके पुरखों ने बहुत बढ़िया से सेट किया है भगवान। 


सचमुच, अगर आप आईएएस- आईपीएस हैं , तो भगवान हैं।  आपके लिए सब कुछ संभव है.... आपके नाम के साथ सिविल सर्वेंट जुड़ा हुआ है लेकिन आप सर्वेंट थोड़े हैं। आप तो मालिक हैं। हाकिम हैं। संविधान ने आपको सर्वेंट बनाया लेकिन आप तो हाकिम बन कर और तन कर  बैठे रहते हैं । आप मालिक के रूप में दिखते हैं और जनता सर्वेंट के रूप में दिखती है। जनता में इतनी हिम्मत कहां है कि आपको सर्वेंट बोले। जनता तो बेचारी है।  फिर भी आपको शर्माने  की जरूरत नहीं है, क्योंकि आप धरती के भगवान हैं। 

सचमुच, अगर आप आईएएस- आईपीएस हैं , तो भगवान हैं।  आपके लिए सब कुछ संभव है....

भगवान आप दारोगा को भी फोन करते हैं, तो बाबू कह कर बात करते हैं, क्योंकि थाना तो आप  5-5 लाख में बेचते हैं। आप बालू माफियाओं के साथ बालू -बालू खेल सकते हैं। आप प्रेमिकाओं की लाइन लगा सकते हैं।  रेप तक कर सकते हैं । कोई  कुछ साबित नहीं कर सकता।   आपकी दोस्ती और रिश्तेदारी के आगे पूरी दुनिया नतमस्तक है। आप की कलाबाजी के आगे भी पूरी दुनिया नतमस्तक है। अखबारों में धड़ल्ले से छपता है- 4 करोड़ का फ्लैट 14 करोड़ की संपत्ति... लेकिन कोई यह नहीं पूछ सकता कि इतनी संपत्ति आयी कहां से ?  क्या किसी प्रोफेसर के पास नौकरी में आने के बाद इतनी संपत्ति होती है  महाराज!  वेतन तो आप दोनों का बराबर  होता है न...


भगवान आपने एक प्रतियोगिता परीक्षा पास की,  दुनिया की सारी परीक्षाएं पास नहीं की। लेकिन आप खुद को सर्वज्ञाता समझते हैं। आप बहुत ब्रिलियंट रहते, तो कोई आविष्कार करते।  नया प्रयोग करते। सामाजिक बदलाव लाते। लेकिन आप में नैतिक बल है कहाँ? सरकार कह रही है कि दहेज बंद करो और आप खुद दो करोड़ दहेज लेकर शादी किए हैं । सरकार कहती है कि शिक्षा में सुधार लाएंगे और आपका बेटा  कान्वेंट में पढ़ता है। सरकार कहती है कि बेरोजगारी दूर करेंगे और आपकी एजेंसी सरकारी ऑफिसों में संविदा कर्मियों को रखवाती है। 

हे भगवान!  हे आर्यपुत्र ! क्या आपको शर्म नहीं आती। सारा भ्रष्टाचार आप से ही शुरू होता है। आप अगर ठीक हो जाएं,  तो नीचे का सिस्टम दुरुस्त हो जाए। लेकिन आपको तो पूजा सिंघल बनने में मजा आता है....

Tuesday, March 29, 2022

सच में निराले थे "सूर्यकांत त्रिपाठी निराला"

 सच में निराले थे "सूर्यकांत त्रिपाठी निराला"


एक बार देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू जी इलाहाबाद आए हुए थे। इलाहाबाद के दारागंज में एक प्रतिष्ठित व्यक्ति के घर पर स्वागत समारोह एवं चाय नाश्ता का प्रबंध किया गया था। जब निराला को पंडित नेहरू के आने की सूचना मिली, तब वे चाय पीने जा रहे थे। उनके हाथ में चाय का कुल्हड़ था, वे कुल्हड़ को हाथ में लिए हुए ही चल पड़े, स्वागत समारोह स्थल उन महाशय की कोठी की ओर नेहरू से मिलने वहां तैनात सुरक्षाकर्मियों ने महाकवि को नहीं पहचाना इसलिए वे उन्हें अंदर नहीं जाने दे रहे थे। 


बस फिर क्या था निराला आग बबूला हो गए और बोले कि होंगे तो होंगे तुम्हारे प्रधानमंत्री, मेरे लिए तो वे आज भी जवाहरलाल नेहरू ही है। यह कहते हुए वे कोठी की सीढ़ी से नीचे उतर चुके थे, अंदर बैठे कुछ लोगों ने यह सारी बातें सुन ली थी, वे लोग दौड़े-दौड़े बाहर आए और निराला को मानते हुए बोले माफ़ी चाहते है हमलोग सुरक्षा व्यवस्था में लगे लोग आपको नहीं पहचान सकें, 'चलिए आप पंडित नेहरू जी से मिल लीजिए' पर कवि पर तो क्रोध सवार होता था तो फिर वे किसी के मानने से भला कब मानने वाले थे, और वे नेहरू से बिना मिले ही लौट आए। 

बाद में जब यह पूरी बात नेहरू को पता लगी तो जब वे अगली बार इलाहाबाद के दौरे पर आए तो उन्होंने ख़ुद अपने सेक्रेटरी को बोलकर निराला के पास कार भेजी और संदेश भिजवाया की प्रधानमंत्री आपसे मिलना चाहते हैं। मगर निराला जी ने उनसे मिलने से साफ मना कर दिया और कहा कि कह देना "अपने प्रिय प्रधानमंत्री से की महाकवि निराला प्रधानमंत्री से नहीं मिलना चाहता", और कार जैसे आई थी वैसे ही खाली ले जाओ। 

इतना ही नहीं एक जब हमारे देश के प्रथम राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद जी इलाहाबाद आए तो उन्होंने भी निराला से मिलने के लिए उनके पास कार भेजवाई थीं तो उस समय भी निराला ने राष्ट्रपति से मिलने से मना कर दिया था, तो कुछ ऐसा ही था महाप्राण निराला का स्वाभिमान..!

Saturday, March 26, 2022

राजनीति के चक्कर में आपसी संबंध बर्बाद न करें.!

राजनीति के चक्कर में आपसी संबंध बर्बाद न करे। अगर कोई आपका साथी आपसे अलग विचारधारा रखता तो इसका ये मतलब नही है की वो विद्रोही है। जब किसी को खून की जरूरत होती है तो शायद किसी पार्टी के नेता ख़ून देने जाता हो लेकिन आपका दोस्त जरूर जाएगा।जो की आपके लिए ख़ून क्या जान भी दे सकता है,उससे राजनीतिक बात पर ज्यादा बहस न करे। कही ऐसा न हो की आप तर्क तो जीत जाए और वो संबंध हार जाए।

Friday, March 11, 2022

धर्म सुदामा जैसे निःस्वार्थ तपस्वियों के त्याग की शक्ति से जीवन पाता है।

 कृष्ण सुदामा से बार-बार कहते रहे कि कुछ मांगो मित्र, पर सुदामा ने बड़ी शालीनता से उनके हर अनुरोध को ठुकरा दिया। तीन मुट्ठी तन्दुल ले कर गए दरिद्र सुदामा जब द्वारिकाधीश से बिना कुछ लिए लौट गए तो रुक्मिणी ने कहा, "प्रभु! ये तो सबकुछ ठुकरा कर चले गए। अब क्या होगा?"

    भगवान बोले, "जानती हो देवी! व्यक्ति यदि अपने अंदर के लोभ को मार दे तो वह ईश्वर से भी पराजित नहीं होता। सुदामा को इस संसार में किसी चीज का लोभ ही नहीं है, वह तो केवल अपनी पत्नी के कहने पर आ गया है। उसे न अपने मित्र कृष्ण से कुछ चाहिए, न भगवान कृष्ण से। मैं जानता था कि यह मुझसे कुछ नहीं लेगा।"

    "पर प्रभु! सुदामा जी के परिवार की दशा तो देख रहे हैं न आप? ये कुछ मांगे न मांगे, पर उनके दुख को दूर करना आपका कर्तव्य है।"

    कृष्ण मुस्कुराए। कहा, "तुम नहीं जानती इस सुदामा को! सारा संसार जिस कृष्ण को भगवान कहता है, विडम्बना देखो कि वह चाह कर भी इस विपन्न ब्राह्मण को कुछ दे नहीं पायेगा। इसके घर पहुँचने से पहले मैं इसकी झोपड़ी को महल बना कर उसे मोतियों से भर दूंगा, पर यह उसे भी क्रूरता पूर्वक ठुकरा देगा। यह मेरे द्वारा दिये गए धन को तिनके से भी नहीं छुएगा। तभी तो इस विशाल संसार मे कृष्ण को अपना मित्र बता सकने का अधिकार समय ने केवल इसे ही दिया है। इस समय संसार में केवल हमीं दो लोग हैं जिन्होंने किसी से कुछ नहीं लिया। कुछ भी नहीं।"

      यह कैसी बात हुई प्रभु? क्या सुदामा जी अपने परिवार की दरिद्रता दूर करने का प्रयत्न नहीं करेंगे?

      कृष्ण खिलखिला उठे। बोले, " इस कृष्ण को संसार मे सुदामा से अधिक कोई नहीं जानता देवी। वह जानता है कि द्वारिका पहुँच जाने से ही उसका कार्य सम्पन्न हो गया है, मैं अब उसके परिवार का हर दुख दूर कर दूंगा। बस वह अपने मुख से कुछ नहीं मांगेगा, न स्वयं मेरा सहयोग स्वीकार करेगा।

       रुक्मिणी कृष्ण को आश्चर्य से देखती रह गईं। कृष्ण बोले, "ऐसे भक्तों की भक्ति करने का मन होता है जो अपने आराध्य से भी कुछ न लेना चाहते हों। अपनी छोटी छोटी इच्छाओं के लिए ईश्वर को पुकारने वाले मनुष्य न धर्म के सगे होते हैं न सभ्यता के। धर्म सुदामा जैसे निःस्वार्थ तपस्वियों के त्याग की शक्ति से जीवन पाता है। यह तो इसका प्रेम था जो मुझतक पैदल चला आया, नहीं तो सुदामा जैसे त्यागी ब्राह्मण जब पुकार दें, ईश्वर स्वयं उनकी चौकठ तक पहुँच जाएंगे।

रुक्मिणी ने कृष्ण को प्रणाम कर के कहा, "धन्य हैं आप! जैसे आप, वैसे ही आपके मित्र..."



मोदी से बड़ा 'मोदी' होगा, योगी के बाद जो आएगा वह योगी से बड़ा 'योगी' होगा.!

 फणीश्वर नाथ रेणु के उपन्यास 'परती परिकथा' में एक पात्र है लुत्तो! वह उपन्यास के नायक जीतन से चिढ़ा रहता है, और हमेशा अपने मासूम(मूर्ख) समर्थकों की भीड़ लेकर जीतन को परेशान करने का प्रयास करता रहता है। एक बार जब वह हजारों की भीड़ को झूठा भय दिखा कर जीतन को मारने के लिए उकसा लाता है तो मन ही मन सोचता है- "यह भीड़ जल्दी से जल्दी जीतन को चीड़ फाड़ क्यों नहीं देती... जनता सब कुछ तहस नहस क्यों नहीं कर देती..."

    जनता के चुने हुए प्रतिनिधियों को जल्दी से जल्दी उखाड़ कर फेंक देने की बेचैनी में मर रहे इन टुच्चे पत्रकारों को देख कर मुझे परती परिकथा का वह धूर्त लुत्तो याद आता है। ईसाई मिशनिरिओं की छोड़ी हड्डियों पर पलने वाले ये नीच यदि पा जाएं तो शायद दांत काट कर मार दें उनको...

    पिछले वर्ष भर से बंगाल में रोज ही राजनैतिक कार्यकर्ताओं की निर्मम हत्याएं हो रही हैं, केरल में भी ऐसी हत्याएं आम हैं। पर ईसाई मिशनरियों के हाथों अपनी आत्मा बेंच चुके इन धूर्त लेखकों/पत्रकारों के लिए वह टेरर नहीं है। लेकिन कभी दंगा प्रदेश बन चुके राज्य में पिछले पाँच वर्ष में कोई भी दंगा नहीं हुआ, फिर भी इन्हें यूपी में टेरर दिख रहा है।

    मेरे एक परिचित हैं। नीतीश कुमार के शासन के पहले उनके पिताजी मीरगंज स्टेशन पर पॉकेटमारी करते थे। वे आजकल योगी आदित्यनाथ को आतंकी बताते हैं। सुबह जगने से ले कर रात को सोने के समय तक वे पानी पी पी कर मोदी योगी को कोसते हैं।

        नरेंद्र मोदी और योगी आदित्यनाथ ने अपने विरोधियों की जितनी घृणा झेली है, उतनी घृणा किसी राजनीतिज्ञ को नहीं मिली। सोच कर देखिये, क्या इस घृणा का कारण केवल सरकार की कमियां हैं? नहीं! कमियां तो हर सरकार में होती हैं, पर पहले ऐसी घृणा नहीं दिखी कभी। दरअसल इस घृणा का कारण है हिंदुत्व! इस घृणा का कारण है हिंदुत्व का पुनरूत्थान! ईसाई उत्कोच से पल रहे इन धूर्तों को हिन्दू और हिंदुत्व से इतनी पीड़ा है कि वे इसे रोकने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। मोदी योगी और अमित शाह के लिए दशक भर से किया जा रहा विषवमन इसी घृणा का नतीजा है।

      पर ये धूर्त नहीं जानते कि दानवी घृणा भी देवत्व को पुष्ट करती है। इन नीच प्रपंचियो की घृणा ही योगी आदित्यनाथ के लालकिला तक पहुँचने का मार्ग प्रसस्त करेगी। राजनीति में कुछ भी पाँच वर्ष के लिए नहीं होता...

      तुम्हारी पीड़ा कभी समाप्त नहीं होगी बिके हुए लोगों। मोदी के बाद जो आएगा वह मोदी से बड़ा 'मोदी' होगा, योगी के बाद जो आएगा वह योगी से बड़ा 'योगी' होगा। युग बदल गया है।